भैंस फ़ार्म
हर भैंस से ज़्यादा दूध और ज़्यादा फ़ैट।
मुर्रा, ग्रेडेड मुर्रा और देसी भैंस का आहार चार्ट: रोज़ की ख़ुराक, दूध, गाभिन और बढ़वार के लिए हर दिन कितना खिलाएँ।
भैंस को रोज़ कितना आहार चाहिए?
पहले उसकी रोज़ की ख़ुराक, फिर हर लीटर दूध पर 1.25 kg TMR-E संपूर्ण आहार। बिल्कुल चारा न हो, तो रोज़ की ख़ुराक 8–9 kg TMR-E है। यानी बिना चारे के 8 लीटर दूध देने वाली भैंस को रोज़ लगभग 18–19 kg TMR-E चाहिए: 8–9 kg उसके शरीर के लिए और 10 kg उसके दूध के लिए। चारा हो, तो बहुत कम लगता है।
भैंस का आहार चार्ट: रोज़ की ख़ुराक
भरपूर हरा चारा
रोज़ 28–30 kg हरा चारा। रोज़ की ख़ुराक के लिए TMR-E की ज़रूरत नहीं।
सिर्फ़ सूखा चारा
रोज़ 9–10 kg सूखा चारा (भूसा या पुआल)।
थोड़ा हरा, थोड़ा सूखा
रोज़ 14–15 kg हरा चारा और 4–5 kg सूखा चारा।
बिल्कुल चारा नहीं
रोज़ 8–9 kg TMR-E। सिर्फ़ TMR-E से भी उसका पेट भर जाता है।
फिर, उसके दूध के लिए
वह जितना दूध दे, हर लीटर पर 1.25 kg TMR-E जोड़ें। 4 लीटर → 5 kg। 8 लीटर → 10 kg।
भैंस या गाय: क्या बदलता है
भैंस को हर लीटर पर ज़्यादा आहार क्यों चाहिए?
भैंस का दूध गाय के दूध से गाढ़ा होता है: हर लीटर में ज़्यादा फ़ैट और ज़्यादा ठोस, अक्सर 6–8% फ़ैट। यह गाढ़ा दूध बनाने में ज़्यादा ऊर्जा और प्रोटीन लगता है, इसलिए हर लीटर पर उसे ज़्यादा आहार चाहिए। डेयरी इस गाढ़ेपन के पैसे देती है, इसलिए दूध और फ़ैट के लिए अच्छा खिलाने का पैसा वापस आ जाता है।
हर भैंस को क्या चाहिए
दूध दे रही
रोज़ की ख़ुराक, और हर लीटर पर 1.25 kg TMR-E। Milk Booster भी दें: 4 लीटर तक रोज़ 1 सैशे, उससे ज़्यादा पर 2 सैशे।
सूखी
सिर्फ़ रोज़ की ख़ुराक: उसका चारा, या चारा न हो तो रोज़ 8–9 kg TMR-E।
गाभिन
रोज़ अतिरिक्त TMR-E: महीने 1–3 में +1 kg, महीने 4–7 में +2 kg, महीने 8–10 में +3 kg। दूध दे रही हो या सूखी, दोनों में एक जैसा।
पड़िया और कटड़े
शरीर के वज़न के हिसाब से, हरे चारे के साथ: 100 kg पर रोज़ लगभग 2 kg TMR-E, 150 kg पर 3 kg, 200 kg पर 3.5 kg और 250 kg से 4 kg। हरा चारा न हो, तो 1.5 kg और जोड़ें। 3 महीने से छोटे बच्चे: दूध और काफ़ स्टार्टर, TMR-E नहीं।
भैंस की देखभाल जो दूध और फ़ैट बचाए
- उसे ठंडा रखें। भैंस को गाय से ज़्यादा गर्मी लगती है: छाया दें, और गर्म घंटों में उसे पानी में लोटने दें या उस पर पानी डालें।
- दिन भर उसके सामने साफ़ पानी, गर्मी में ज़्यादा।
- आहार एक हफ़्ते में बदलें, हर दिन नया आहार थोड़ा ज़्यादा।
- रोज़ एक ही समय पर, आराम से दूध निकालें, और पूरा दूध निकालें: आख़िरी दूध में सबसे ज़्यादा फ़ैट होता है।
- ब्याने के बाद गर्मी (हीट) पर ध्यान से नज़र रखें। भैंस अक्सर चुपचाप गर्मी में आती है, रात में या सुबह-सुबह। अगर वह गर्मी में नहीं आई, तो अपने पशु डॉक्टर से पूछें।
- थन गर्म, सख़्त या सूजा हो, या दूध में थक्के हों: अपने पशु डॉक्टर को बुलाएँ।
आपकी भैंसें, आपका हिसाब
चारा योजना आपकी सभी भैंसों और आपके पास के चारे का हिसाब लगाती है: रोज़ कितने kg, महीने में कितनी बोरी और हर लीटर दूध पर आहार का ख़र्च।